Thursday, 8 May 2014

लालकिले से (भाग-95)




लालकिले से (भाग-95)
बूथ कैप्चरिंग कर मोदी को हराने के लिए ईवीएम के बजाय बैलेट से होगा वोट, 60 से ज्यादा प्रत्यााशी होने पर ईवीएम से डाले जाते हैँ वोट, बैलेट में आसानी से होती है बूथ कैप्चरिंग
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मुख्य चुनाव आयुक्त संपत और चुनाव आयुक्त ब्रह्मा पहले उर्जा विभाग में थे सचिव
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1. बनारस में डमी प्रत्याशियों की भरमार। 60 से ज्यादा प्रत्याशी होने पर अब वहां ईवीएम से नहीं बैलेट से वोट डाले जाएंगे। यह जानबूझकर करवाया गया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने जानबूझकर डमी प्रत्याशी खड़ी करवाए ताकि, ईवीएम से वोटिंग न हो। ईवीएम में बूथ केप्चरिंग बहुत धीमी होती है। ईवीएम में एक के बाद एक होती है जबकि बैलेट में वोट छापे जाते हैं। लगभग 50 गुना तेज। बूथ कैप्चरिंग के लिए ही माफिया डान मुख्तार अंसारी को जेल से पैरोल पर छोड़ा गया। ईवीएम में भाजपा प्रत्याशी का नाम तीसरे नंबर पर रहता है। बैलेट सिस्टम में नरेन्द्र नाम पुरानी व्यवस्था में पीछे भी जा सकता है अगर नाम अल्फा बेट के क्रम से डाले। ईवीएम में राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों के नाम पहले होते हैं।
2. यह महज संयोग है कि मुख्यु चुनाव आयुक्त वीएस संपत, चुनाव आयुक्त एचएस बह्मा इससे पहले उर्जा सचिव थे। कोयले और उर्जा का नजदीकी संबंध है। इसलिए इन्हें उर्जा कहां से मिल रही है यह पता करना बहुत ही आसान है।
नामांकन भरने के दिन बनारस नरेन्द्र मोदी को डेढ़ घंटे तक डीएम कार्यालय के बाहर इंतजार करना पड़ा। मुख्यमंत्री के प्रोटोकाल के तहत डीएम को उनके बैठने की व्यवस्था करनी थी।
3. नामांकन के दिन बनारस में रोड शो के दौरान एक चौराहे पर सभा संबोधित करने पर चुनाव आयोग ने एन वक्त पर रोक लगा दी।
बनारस के कैंट और शहर में मतदाता पर्चियां गायब।
4. मतदाता पर्चियां बांटने वाले 27 भाजपा कार्यकर्ता 151 यानी शांति भंग की धारा में बंद। अभी तक २० ही छूटे।
5. एक हाल में 150 लोगों से मिलने से कैसे शांति व्यवस्था भंग हो सकती है। पहले अुनमति नहंी दी फिर रात को 10 बजे इसकी अनुमति तब दी गई जब भाजपा ने चुनाव अयोग को लिखकर दे दिया कि समय पर अुनमति नहीं मिलने वे कार्यक्रम नहीं कर रहे हैं।
अगर सुरक्षा ही मुद्दा थी तो फिर राहुल गांधी को क्यों और कैसे एक दिन में अनुमति कैसे मिल गई।
6. अमदाबाद में मोदी के चुनाव केन्द्र से 120 मीटर दूर प्रेस कान्फेंस करने पर एफआईआर दर्ज करवा दी। इसमें भी उन्हें नोटिस नहीं देेकर चुनाव आयोग ने प्राकृतिक न्याय के नियमों के तहत सुनवाई के अधिकार के तहत नोटिस नहीं दिया गया। जबकि अमेठी में राहुल गांधी बूथ में गु्रप में लोगों से बात करते नजर आए इस पर अभी तक चुनाव ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
7. अमित शाह पर भड़काउ भाषण देने पर चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी पर सहारनपुर के कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद के भड़काउ भाषण देने के बाद गिरफ्तारी होने के बाद उनके चुनाव लडऩे या प्रचार करने पर रोक क्यों नही लगाई गई।
8. फारूख अबदुल्ला के ये कहने पर कि यदि मोदी सरकार बन गई तो हम पाकिस्तान के साथ जा सकते वाले बयान पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
9. अगर गिरिराजसिंह के ये बयान देने पर मामला दर्ज हो सकता है कि मोदी के विरोधियों को पाकिस्तान भेज दिया जाएगा तो फारूख अबदुल्ला के इस बनान पर मामला क्यों नहीं दर्ज हुआ कि मोदी समर्थकों को समुद्र में डूब जाना चाहिए।
10. समाजवादी पार्टी के नेता आजमखान पर विवादास्पद बयानों के बाद बैन जारी है लेकिन कांग्रेस के नेता बेनीप्रसाद वर्मा के नित नए विवादस्पद बयानों पर चुनाव आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
11. चुनाव के एक दिन पहले अमेठी से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुमार विश्वास के परिजनों को बाहर जाने के लिए कह दिया जाता है और सोनिया और राहुल के बाहरी पीए बूथों में घूमते रहे।
12. मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल सिहं, कमलनाथ, ज्योर्तिआदित्य सिंधिंया, अरूण यादव और कांतिकाल भूरिया के क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारियों को ईसी ने एकतरफा बदला। शायह कुछ हार से बच जाएं। नई नियुक्तियों के लिए पैनल के नियम का भी उल्लंघन नहीं किया।
13. जो चुनाव आराम से 7 चरणों में हो सकते थे उसे 9 चरणों में कर पूरी चुनार्वी प्रक्रिया को नीरस बना दिया। शुरूआ के दो चरण तो आसानी से किसी भी चरण में एडजेस्ट हो सकते थे।
14. महाराष्ट्र में लाखों वोटरों के नाम कट गए। सिर्फ चुनाव आयुक्त ब्रह्मा की माफी से काम नहीं चलेगा, दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है ताकि राजनीतिक कारणों से नाम कटवाने वालों को सबक मिले।
15. संघ और बीजेपी का खुफिया तंत्र विपक्षियों की साम, दाम, दंड, भेद वाली तैयारी को पूरी तरह से आंकने में असफल रहा।
16. लगता है कि चुनाव आयोग बेहद प्रेशर में है। क्यों प्रेशर में है पढें बिन्दु नंबर दो।

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